बागेश्वर धाम 2023 में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अनकही यात्रा का कहानी और कुछ आश्चर्यजनक तथ्य

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, एक धार्मिक गुरु, का जन्म मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ पंज गांव में हुआ था।

पांच साल की छोटी उम्र में, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्म के प्रति असाधारण झुकाव प्रदर्शित किया और प्राचीन ग्रंथों की गहरी समझ प्रदर्शित की।

उनकी माता का नाम सरोज गर्ग और पिता का नाम राम कृपाल गर्ग है। उनको एक छोटे भाई और एक बहन है।

बचपन से ही महाराज धीरेंद्र कृष्ण की धर्म में गहरी रुचि थी। उनके दादा ने उन्हें पढ़ाया था।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए एक ग्रामीण स्कूल में भर्ती हुए। फिर उन्‍होने एक कॉलेज से स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की।

प्रत्‍येक मंगलवार को धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री का दरबार बागेश्‍वर धाम के हनुमान मंदिर में लगता है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के गुरू उनके दादा सन्‍यासी बाबा थे, जिनके प्रेरणा से इन्‍हे ज्ञान प्राप्‍त हुआ।

दादाजी के समाधि लेने के बाद उनकी देखभाल शास्त्री जी करने लगे और बाद में उन्हें वहां का पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया।

शास्त्री के परोपकारी प्रयास सराहनीय है। उन्होंने बागेश्वर धाम के आसपास धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना की, वंचितों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कीं।

शास्त्री की चमत्कारी उपचार क्षमताओं के बारे में किवंदंतियाँ फैली हुई हैं। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने दिव्य आशीर्वाद और प्रार्थनाओं के माध्यम से पुरानी बीमारियों से पीड़ित कई व्यक्तियों को ठीक किया।

बागेश्वर धाम की दिव्य सुंदरता ने शास्त्री को प्रकृति की दिव्य शक्तियों को समर्पित भजनों और प्रार्थनाओं की रचना करने के लिए प्रेरित किया, जिन्हें आज भी भक्तों द्वारा सुना जाता है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्‍त्री पर कई लोगों ने अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर हाल ही में उनके खिलाफ मुहिम छिड़ गई है।

धीरेन्‍द्र कृष्‍ण शास्‍त्री प्रतिदिन लगभग 8000रु की कमाइ कर लेते हैं। माह में लगभग दो से तीन लाख रुपये उनकी आमदनी है। उनका नेटवर्थ तकरीबन 19.5 करोड़ के लगभग में पहुंच गया है।

धीरेन्‍द्र कृष्‍ण शास्‍त्री को ब्रिटिश संसद से तीन पुरस्‍कार --संत शिरोमणि, वर्ल्‍ड बुक ऑफ लंदन और वर्ल्‍ड बुक ऑफ यूरोप मिले।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर धीरेन्‍द्र कृष्‍ण शास्‍त्री ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए "हमें अपना समर्थन दो, हम हिंदू राष्ट्र देंगे" का नारा दिया।