मिलिए भारत में हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्‍वामीनाथन से, जिसने देश के लोगों का पेट भरा, उनके जीवन परिचय एवं नेट वर्थ  

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कौन थे एम. एस. स्‍वामीनाथन (Who Was M. S. Swaminathan)

एम. एस. स्‍वामीनाथन भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है। उनके नेतृत्‍व में वैज्ञानिक प्रयासों से गेहूँ और चावल की अधिक उपज देने वाली किस्‍मों को विकासित किया गया। जिसके कारण भारत में खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांति हो गयी। 1950 के दशक में, उन्होंने भारत में कृषि अनुसंधान में अपना करियर शुरू किया। 1960 के दशक में, एम. एस. स्वामीनाथन ने नॉर्मन बोरलॉग के साथ मिलकर भारत में हरित क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने उच्च उपज देने वाली गेहूं की किस्मों को विकसित किया, जिसने भारत की गेहूं उत्पादन में भारी वृद्धि की।

Table of Contents

एम. एस. स्‍वामीनाथनका जन्‍म और माता-पिता (M. S. Swaminathan: Birth And Parents)

उनका जन्‍म मद्रास प्रेसीडेंसी के तिरुचिरापल्ली जिले के पुदुक्कोट्टई में 15 सितंबर 1925 को हुआ था। एम के साम्बशिवन उनके पिता थे एवं उनकी माता पार्वती थंगम्मल संबसिवन एक कुशल गृहणी थी।

डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन
डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन

एम. एस. स्वामीनाथन अपने भाई-बहन एवं परिवार के साथ तमिलनाडु राज्‍य के कुंभकोणम में रहते थे। वे सिंह राशि के हैं।

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एम. एस. स्‍वामीनाथनका भाई-बहन (M. S. Swaminathan Siblings)

उनको एक छोटा भाई था जिनका नाम पी. एस. स्‍वामीनाथन जो एक शिक्षाविद् और लेखक थे। उनकी बहन का नाम आर. एस. स्‍वामीनाथन थी जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्‍होंने महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काफी काम किया। उनके भाई ने देश के कई विश्‍वविद्यालयों में अध्‍यापन का कार्य किया था तथा कई पुस्‍तक लिखे थे।

एम. एस. स्‍वामीनाथनकी शिक्षा-दीक्षा (M. S. Swaminathan Education)

उनकी प्राथमिक शिक्षा कुंभकोणम के एक स्‍थानीय विद्यालय में हुई थी। उसने कुंभकोणम के कैथोलिक लिटिल फ्लावर हाई स्‍कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। उसने महाराजा कॉलेज तिरुवनंतपुरम् से जंतुविज्ञान (जूलोजी) में 2040 में बीएससी की डिग्री प्राप्‍त की। उसने 2044 ई. में कोयंबटूर कृषि महाविद्यालय से कृषि विज्ञान में बीएससी किया।

एम. एस. स्‍वामीनाथन ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) से कृषि विज्ञान (आनुवांशिकी और पादप प्रजनन में विशेषज्ञता) में एमएससी सन् 1947 में की तथा उसने 1952 में कैम्ब्रिज विश्‍वविद्यालय इंगलैंड से पीएचडी की डिग्री प्राप्‍त की।

उसने अपने स्‍कूल और कॉलेज दिनों में कृषि विज्ञान, जंतुविज्ञान, आनुवांशिकी तथा पादप प्रजनन जैसे कई विषयों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने चावल के पादप प्रजनन पर शोध कर पीएचडी की डिग्री हासिल की।

एम. एस. स्‍वामीनाथन की उम्र (M. S. Swaminathan Age)

डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन
डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन

महान वैज्ञाानिक एम. एस. स्‍वामीनाथन का जन्‍म 7 अगस्‍त 1925 को हुआ और उनकी मृत्‍यु 28 सितंबर 2023 को 98 वर्ष की उम्र में हुआ।

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एम. एस. स्‍वामीनाथन की संक्षिप्‍त जीवनी (M. S. Swaminathan: Quick Facts)

प्रसिद्ध नाम (Famous Name)एम. एस. स्वामीनाथन
निकनेम (Nick Name)एम. एस. स्वामीनाथन
पूरा नाम (Full Name)मनकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन
जन्‍म तिथि (Date of Birth)7 अगस्त 1925
जन्‍म स्‍थानकुम्भकोणम
गृहनगरकुम्भकोणम
उम्र (Age)98 साल
मृत्यु तिथि28 सितंबर, 2023 (गुरुवार)
मृत्यु स्थानचेन्नई, भारत
कारण की मृत्युउम्र से संबंधित बीमारी
पिता (Father)एम के साम्बशिवन
माता (Mother)पार्वती थंगम्मल संबसिवन
भाई (Brother)एम. एस. कृष्णमूर्ति
बहन (Sister)लक्ष्मी शिवरामन
पेशा (Profession)लेखक, कृषिविज्ञानी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, आनुवंशिकीविद्
धर्म (Religion)हिन्दू धर्म
जाति (Caste)पता नहीं
राशि-चक्र चिन्‍ह (Zodiac Sign)सिंह
राष्‍ट्रीयता (Nationality)भारतीय
शैक्षिक योग्‍यता (Education Qualification)कृषि विज्ञान में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री हासिल की
स्‍कूल (School)भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
कॉलेज (College)यूनिवर्सिटी कॉलेज तिरुवनंतपुरम, फिट्ज़विलियम कॉलेज
विश्वविद्यालय (University)तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय, केरल विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, वैगनिंगन विश्वविद्यालय और अनुसंधान
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित
पत्‍नी (Wife)मीना स्वामीनाथन (जन्‍म 1955; मृत्यु 2022)
बेटीसौम्या स्वामीनाथन, नित्या स्वामीनाथन, मधुरा स्वामीनाथन
लंबाई (Height)पता नहीं
वजन (Weight)पता नहीं
नेट वर्थ (Net Worth)$10 मिलियन

एम. एस. स्‍वामीनाथन का कैरियर (M. S. Swaminathan Career)

प्रसिद्ध वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन ने अपना करियर 1949 में शुरू किया जब उन्होंने आलू, गेहूं, चावल और जूट जैसी कई फसलों के आनुवंशिकी का अध्ययन किया। भारत के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण धटना थी।  इस देश को बड़े पैमाने पर अकाल और खाद्यान्न की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। ऐसी परिस्थिति में स्वामीनाथन ने नॉर्मन बोरलॉग और अन्य दिग्‍गज वैज्ञानिकों के साथ रिसर्च करके उच्च उपज वाले गेहूं के बीज का उत्पादन शुरू किया।

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एम. एस. स्वामीनाथन: महान संस्‍था संस्‍थापक (M. S. Swaminathan: Institution Builder)

एम. एस. स्‍वामीनाथन एक महान संस्‍था संस्‍थापक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्‍होंने देश में खद्यान उत्‍पादन में वृद्धि करने के उद्देश्‍य से कई संस्‍थाओं की स्‍थापना की। उन्होंने अपने रिसर्च के महान लक्ष्‍यों को आगे बढ़ाने के लिए एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्‍थापना की। उन्‍होंने इस संगठन के माध्यम से भूख और गरीबी को समाप्त करने का प्रयास किया।

फाउंडेशन देश के कृषि क्षेत्र में आशा की किरण साबित हुई। संस्थान किसानों को कृषि शिक्षा और इसकी अत्याधुनिक पद्धतियों की सुविधा प्रदान करता है। स्वामीनाथन ने अपने पूरे करियर में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किआ।

डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन एक बच्‍चे को प्रोत्‍साहित करते हुए
डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन एक बच्‍चे को प्रोत्‍साहित करते हुए

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक (1961-72), आईसीएआर के महानिदेशक और भारत सरकार के कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव (1972-79), और कृषि मंत्रालय के प्रधान सचिव (1979-80) के रूप में कार्य किया।

वह 1980-82 की अवधि में योजना आयोग की विज्ञान और कृषि समिति के सदस्य और फिलीपींस में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक 1982-88 की अवधि में थे। सरकार ने 2004 में स्वामीनाथन को राष्ट्रीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

किसान आत्महत्याओं की वृद्धि का अध्‍ययन करने के लिए तथा इसकी जाँच करने के लिए विशेषज्ञों का एक समूह बनाया गया था।  पैनल ने 2006 ई में अपनी रिपोर्ट जारी की। अपनी सिफारिशों में, आयोग ने सलाह दी कि न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) उत्पादन की भारित औसत लागत से कम से कम 50% अधिक हो।

स्‍वामीनाथन 2007 से 2013 तक राज्यसभा के सदस्‍य भी रह चुके हैं।

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एम. एस. स्वामीनाथन: हरित क्रांति के जनक (M. S. Swaminathan: The Father Of Green Revolution)

एम. एस. स्वामीनाथन ने लगभग छह दशक पहले भारत में “हरित क्रांति” शुरू की। इस अवधि में  गेंहूँ उत्‍पादन को बढ़ाकर भूखमरी की समस्‍या को रोकने का भरपूर प्रयास किया। इस कार्य में भारत सफलता प्राप्‍त की। ये सारा श्रेय एम. एस. स्‍वामीनाथन को जाता है। इसीलिए उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।

हरित क्रांति ने पंजाब और हरियाणा को गेहूं और चावल उत्पादन हॉटस्पॉट में बदल दिया, जिससे कम आय वाले किसानों को काफी लाभ हुआ।

डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन

इस परियोजना को अब भारतीय कृषि में एक परिवर्तनकारी युग माना जाता है। इससे अधिक उपज देने वाली गेहूं की किस्मों और सिंचाई तथा उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा मिला। ऐसे समय में जब भारत गंभीर भूखमरी का सामना कर रहा था, अनाज उत्पादन तेजी से बढ़ा।

उच्च पैदावार वाले गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित करने और किसानों को उनका उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने के उनके प्रयासों ने भारत को खाद्य आयातक से खाद्य निर्यातक में बदलने में काफी योगदान दिया।

एम. एस. स्वामीनाथन को प्राप्‍त पुरस्कार और सम्मान (M. S. Swaminathan: Awards And Honors)

महान शोधकर्ता डॉ. एस. एम. स्वामीनाथन ने कृषि विज्ञान में अपने योगदान और सहयोग के लिए कई पुरस्‍कार प्राप्‍त किया है, जिनमें 2000 में यूनेस्को महात्मा गांधी पुरस्कार और 2007 में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।

उन्हें निम्‍नलिखित सम्‍मान-पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।

1) पद्म श्री (1967)

2) पद्म भूषण (1972)

3) विश्व खाद्य पुरस्कार 1987

4) अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व विज्ञान पुरस्कार 1986

5) पद्म विभूषण (1989)

6) सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 1971

7) इंदिरा गांधी पुरस्कार 1999

8) वांट 2000 से मुक्ति

9) राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार 2013

10) सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2010

एम. एस. स्वामीनाथन: एक लेखक रूप में (M. S. Swaminathan: A Great Writer)

एम. एस. स्‍वामीनाथन एक अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने कृषि विज्ञान और जैव विविधता पर कई शोध लेख और किताबें लिखे हैं। स्वामीनाथन ने 1950 और 1980 के बीच 46 एकल-लेखक पत्र प्रकाशित किए। कुल मिलाकर उन्‍होंने 254 शोध पत्र लिखे थे, जिनमें से 155 शोध पत्र अकेले लिखे थे। उनके वैज्ञानिक शोध-पेपर फसल सुधार (95) साइटोजेनेटिक्स और जेनेटिक्स (87) और फाइलोजेनेटिक्स (72) के क्षेत्र में हैं। उनके सबसे अधिक प्रकाशक इंडियन जर्नल ऑफ जेनेटिक्स (46), करंट साइंस (36), नेचर (12) और रेडिएशन बॉटनी (12) थे।

कुछ चयनित प्रकाशित पुस्‍तकें नीचे दिये गये हैं:

  1. Agricultural Growth and Human Welfare
  2. Science and the Conquest of Hunger
  3. Global Aspects of Food Production
  4. Biotechnology for Asian Agriculture: Public Policy Implications
  5. Agricultural Growth and Human Welfare
  6. Second Agricultural Science Congress: Proceedings
  7. Population, Environment and Food Security
  8. Sustainable Agriculture: Towards Food Security
  9. Sustainable Agriculture: Towards an Evergreen Revolution
  10.  I predict a century of hope towards an era of harmony with nature and freedom from hunger
  11.  Groves of beauty and plenty : an atlas of major flowering trees in India 
  12.  From Rio de Janeiro to Johannesburg: action today and not just promises for tomorrow
  13.  Life and Work of M.S. Swaminathan: Toward a Hunger-free World
  14.  Environment and Agriculture M. S. Swaminathan
  15.  Science and Sustainable Food Security
  16.  From Green to Evergreen Revolution: Indian Agriculture: Performance and Challenges
  17.  Remember Your Humanity: Pathway to Sustainable Food Security
  18.  In search of biohappiness : biodiversity and food, health and livelihood security
  19.  50 Years of Green Revolution: An Anthology of Research Papers
  20.  Combating Hunger and Achieving Food Security
  21.  Major Flowering Trees of Tropical Gardens

एम. एस. स्वामीनाथन पत्‍नी (M. S. Swaminathan Wife)

एम. एस. स्वामीनाथन ने मीना स्वामीनाथन से शादी की, जिनसे उनकी मुलाकात 1951 में कैम्ब्रिज में छात्र होने के दौरान हुई थी। वे चेन्नई, तमिलनाडु, भारत के निवासी थे।

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एम. एस. स्वामीनाथन बच्चे (M. S. Swaminathan’s Children)

डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन अपने बेटी सौम्‍या स्‍वामीनाथन के साथ
डॉ एम. एस. स्‍वामीनाथन अपने बेटी सौम्‍या स्‍वामीनाथन के साथ

एम. एस. स्‍वामीनाथन की तीन बेटियां हैं जिनका नाम सौम्या स्वामीनाथन, मधुरा स्वामीनाथन और नित्या स्वामीनाथन है। उनकी सभी बेटियां सरकारी सेवाओं में बहुत अच्छे पद पर कार्यरत हैं।

एम. एस. स्वामीनाथन कुल संपत्ति (M. S. Swaminathan Net Worth)

एम. एस. स्वामीनाथन देश के एक महान कृषि वैज्ञानिक थे। वह भारत और विदेशों में कई संगठनों में शीर्ष पदों पर कार्यरत थे। उनकी मृत्यु के समय उनकी अनुमानित कुल संपत्ति $10 मिलियन अमरीकी डालर थी, जो उनके सफल करियर के लिए एक श्रद्धांजलि है। हालाँकि, उनकी वास्तविक संपत्ति भारत के कृषि पर्यावरण पर उनका दीर्घकालिक प्रभाव है।

एम. एस. स्वामीनाथन की मृत्यु (The Death Of M. S. Swaminathan)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम. एस.स्वामीनाथन की मृत्‍यु स्‍वाभाविक रूप से हुई, कोई असहज बीमारी नहीं थी। कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। 28 सितंबर 2023 को उनका निधन हो गया। वह अंत तक किसानों के कल्याण और समाज के वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित थे

शोक संदेश और श्रद्धांजलि (Tributes And Condolences)

पीएम मोदी— अपने शोक संदेश में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कृषि में एम. एस.स्‍वामीनाथन के सफल प्रयास से लाखों लोगों के जीवन में सुधार हुआ और हमारे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जिससे हमारे देश के लोगों लिए खाद्य सुरक्षा उपलब्‍ध हुई। प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर कहा, “कृषि में अपने क्रांतिकारी योगदान के अलावा, डॉ. स्वामीनाथन नवप्रवर्तन के पावरहाउस और कई लोगों के लिए एक प्रेरक गुरु थे। “अनुसंधान और मार्गदर्शन के प्रति उनके दृढ़ समर्पण ने वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों की एक पीढ़ी पर एक अमिट छाप छोड़ी है।”

एच. डी. देवेगौड़ा—पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने एम. एस. स्वामीनाथन के निधन पर शोक व्यक्त किया है और कहा कि कई मौकों पर उनके मार्गदर्शन से देश को काफी फायदा हुआ है।

स्‍वामीनाथन ने एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्‍थापना की। हरित क्रांति आंदोलन में उनके नेतृत्व की पहचान के कारण स्वामीनाथन को युनाईटेड नेशन्‍स इन्‍वायरमेंट प्रोग्राम द्वारा आर्थिक पारिस्थितिकी का जनक करार दिया गया।

कांग्रेस पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल—उन्होंने एम. एस.स्वामीनाथन की मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय कृषि में उनके योगदान ने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया।” “हम हर अवसर पर उनके दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया—उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की और भारत की कृषि की समृद्धि और अर्थव्यवस्था में एम. एस.स्वामीनाथन के योगदान की प्रशंसा की।

किसान कार्यकर्ता राकेश टिकैत— उन्होंने कहा कि भारत एम. एस. स्वामीनाथन को देश की कृषि और किसानों के लिए लाए गए लाभकारी सुधारों के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा में उनके योगदान के लिए याद रखेगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल—उन्होंने संवेदना व्यक्त की और कहा कि कृषि में एम. एस. स्‍वामीनाथन के “असाध्य” प्रयासों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया और “लाखों लोगों को खाद्य असुरक्षा से बचाया।”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन—--उन्होंने कहा, “प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक थिरु एम. एस. स्वामीनाथन के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। “स्थायी खाद्य सुरक्षा के विषय में उनके अग्रणी काम का वैश्विक प्रभाव पड़ा है।” “मैं उनके साथ बिताए समय को हमेशा याद रखूंगा। मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की, “इस कठिन समय के दौरान, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ हैं।”

अक्‍सर लोग जो पूछते हैं FAQ

डॉक्टर एम. एस. स्वामीनाथन कौन है?

एम. एस. स्‍वामीनाथन एक भारतीय कृषि वैज्ञानिक, पादप आनुवंशिकीविद्, प्रशासक, कृषिविज्ञानी और सबसे बढ़कर वे एक मानवतावादी व्‍यक्ति थे।

एम. एस. स्वामीनाथन का जन्म कब और कहां हुआ था?

उनका जन्‍म 7 अगस्‍त 1925 को कुंभकोणम, तमिलनाडु में हुआ था।

एम. एस. स्‍वामीनाथन का निधन कब हुआ?

एम. एस. स्‍वामीनाथन निधन 28 सितंबर 2023 को हुआ।

एम. एस. स्वामीनाथन ने क्या आविष्कार किया था?

एम. एस. स्‍वामीनाथन ने 1960 के दशक में अधिक उपज देने वाली गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित करने की विधि का आविष्‍कार किया था। जिसके कारण देश में गेहूँ और धान का काफी पैदावार हुआ और खाद्य संकट की समस्‍या समाप्‍त हो गया।

एम. एस. स्वामीनाथन की उपलब्धियां क्या है?

एम. एस. स्वामीनाथन ने सबसे पहले गेहूँ और धान की एक बेहतरीन किस्म की पहचान की। जिसके कारण देश में इन फसलों की पैदावार काफी हुई और खाद्य संकट की समस्‍या दूर हो गई।


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